मैं पिछले छह साल से प्रोफेशनल प्लेयर हूँ। मेरे लिए कैसीनो कोई शौक या मनोरंजन नहीं है, यह मेरा ऑफिस है। सुबह उठते ही मैं चाय बनाता हूँ और सबसे पहले अपने लैपटॉप के सामने बैठ जाता हूँ। उस वक्त दिमाग बिल्कुल ताजा होता है, कोई जल्दबाजी नहीं होती। मैंने कई प्लेटफॉर्म ट्राई किए हैं, लेकिन पिछले दो सालों से मेरी पूरी रणनीति
vavada के आसपास घूमती है।
बात 2022 की शुरुआत की है। मैं उस समय कुछ दिनों से लगातार घाटे में चल रहा था। दूसरे प्लेटफॉर्म पर मैंने करीब 1.5 लाख रुपए गंवा दिए थे। उस दिन दिमाग खराब था, पत्नी से छोटी सी बात पर झगड़ा हो गया और मैं घर से निकल गया। एक चाय की दुकान पर बैठा था और मोबाइल पर कुछ रिव्यूज पढ़ रहा था। तभी एक दोस्त ने जो ऑनलाइन पोकर खेलता है, मुझे इस प्लेटफॉर्म का नाम बताया। उसने कहा, "यहाँ पर प्रोमो अच्छे हैं और विदड्रॉल प्रोसेस तेज है।" मैंने सोचा, अब और बुरा क्या हो सकता है? तो मैंने वहीं से रजिस्ट्रेशन कर लिया।
पहले दो हफ्ते बहुत मुश्किल रहे। शुरू में मैं उसी पुरानी आदत में खेल रहा था - जल्दी जल्दी बेट लगाना, हर हाथ खेलना। vavada पर लाइव कैसीनो का सेक्शन बहुत अट्रैक्टिव है। डीलर असली हैं, बातचीत कर सकते हो। पहले दिन मैंने 10 हजार लगाए और 3 हजार बचे। लगा कि यह भी वही कहानी है। लेकिन तीसरे हफ्ते मैंने सोचा, यार, अगर प्रोफेशनल बनना है तो स्ट्रैटेजी बदलनी होगी। मैंने सिर्फ ब्लैकजैक पर फोकस करना शुरू किया और बेसिक स्ट्रैटेजी चार्ट को अपने सामने रख लिया।
असली मोड़ तब आया जब एक रात मैं अकेला बैठा था। घर में सब सो चुके थे। मैंने फैसला किया कि आज कोई इमोशन नहीं, सिर्फ गणित खेलेगा। मैंने 20 हजार का एक अकाउंट बनाया और लाइव ब्लैकजैक पर 100-100 रुपए की बेट लगानी शुरू की। उस रात मैंने चार घंटे लगातार खेला। कॉफी पीते हुए, हर कार्ड को नोट करते हुए। जब सुबह पांच बजे उठा तो मेरा बैलेंस 42 हजार हो चुका था। यह कोई बहुत बड़ी जीत नहीं थी, लेकिन मेरे लिए यह साबित करने जैसा था कि डिसिप्लिन काम करता है। उस दिन के बाद से मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
प्रोफेशनल खिलाड़ी होने का मतलब है कि आप अपने बैंकरोल को किसी बिजनेस की तरह मैनेज करते हैं। मैं हर महीने के लिए एक टारगेट सेट करता हूं - 40 से 50 हजार का प्रॉफिट। वो भी तभी जब मार्केट सही हो। vavada पर सबसे अच्छी बात यह है कि यहां पर बोनस नियम साफ हैं। कई कैसीनो पर बोनस लेने के बाद आप फंस जाते हो, यहां पर वैगरिंग रिक्वायरमेंट समझ में आता है। मैं हमेशा वो बोनस ही लेता हूं जहां रोलओवर कम हो और गेम कंट्रीब्यूशन 100% हो।
अब मैं आपको एक मजेदार किस्सा सुनाता हूं। पिछले साल दिवाली के आसपास की बात है। मैंने सोचा क्यों न थोड़ा रफ्तार भरी खेलूं। लाइट-स्पीड ब्लैकजैक पर चढ़ गया। उस दिन लगातार 14 हाथ जीते। हां, 14 हाथ! मुझे खुद यकीन नहीं हो रहा था। डीलर इंडोनेशियन थी, वो भी हंस रही थी और बोल रही थी, "सर, आप आज मशीन की तरह जीत रहे हैं।" उस सेशन में मैंने 1.2 लाख का प्रॉफिट बना लिया। तुरंत 80 हजार निकाल लिए और बाकी से खेलता रहा। दिवाली पर पत्नी को सरप्राइज देने के लिए उस पैसे से सोने की चेन खरीदी। उसे पता नहीं था कि पैसा कहां से आया, लेकिन मैं जानता था कि यह मेरी स्किल और धैर्य का नतीजा है।
जो लोग कहते हैं कि कैसीनो में सिर्फ किस्मत काम करती है, वो गलत हैं। हां, शॉर्ट टर्म में किस्मत का रोल होता है। लेकिन लॉन्ग टर्म में गणित और मनोविज्ञान काम करता है। मैंने सीखा है कि कब रुकना है, कब और दबाना है और सबसे जरूरी, कब टेबल छोड़कर उठ जाना है। vavada पर हजारों लोग हैं जो लत की वजह से खेलते हैं, लेकिन मैं वहां पर अपने प्रोफेशनल टच के लिए जाना जाता हूं। मेरे कुछ रेगुलर दोस्त भी बन गए हैं चैट में। हम एक दूसरे को टिप्स नहीं देते, बस हौसला बढ़ाते हैं।
हां, बुरे दिन भी आते हैं। पिछले महीने लगातार पांच दिन घाटा हुआ। करीब 80 हजार डूबे। लेकिन मैंने घबराकर पैसा नहीं लगाया। बस दो दिन ब्रेक लिया, रूटीन चेक किया और वापस आया। अगले हफ्ते में वो सब वसूल लिया। यही फर्क है एक प्रोफेशनल और एक एमेच्योर में। एमेच्योर हारकर डर जाता है या और पागलों की तरह खेलता है। प्रोफेशनल हार को भी एक डेटा पॉइंट की तरह लेता है।
आज मैं अपने इस काम को लेकर शर्मिंदा नहीं हूं। मैं दिन में 4-5 घंटे देता हूं, उतना ही जितना कोई नौकरी वाला देता है। फर्क सिर्फ इतना है कि मेरा ऑफिस ऑनलाइन है और मेरी कमाई टैक्स फ्री है (अभी तक तो ऐसा ही है)। vavada ने मुझे एक प्लेटफॉर्म दिया है जहां मैं अपनी स्किल को भुना सकता हूं। बस शर्त यह है कि अनुशासन कभी ढीला न हो। जिस दिन लगे कि आज मस्ती के लिए खेल रहा हूं, समझ जाओ प्रोफेशनल खत्म हो गया।